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लाखा बळद (हूंडा) बंजारा कविता

  • Release Date: October 15, 2025

लाख मोलेरो लाखा बळद तू,
लाखेमायी वकरो !
गावडीर दूद पीलेन तू,
छेळीरे आंग झूकरो….

लाखेती कमायवाळो लाखा,
लाख रपीयाम वकगो !
लखलख वजाळेमायी,
पालडा तारो झूकगो….

हेकाड मारो लाखारे तू,
आबं जरा सदरजो !
हूंडा नामेर पेरणी वेरी,
सरळ तासेप आजो…..

याडी-बापेर लाल तू,
लाखेमायी येकं !
वकोवकाय बळद तू,
आबं मारसामूचं देकं…

कोढी कोढी जमान तारे,
हूंडार बरोबरी कीदे !
छेळी कोनीं वाघणं वेनं,
करींव येके येकेन सूदे….

छोरी दकायेन रूपवान,
हूंडा बी आडमाप चायं !
आसेती गरीबेर छचारूर,
वाया कूकायी वीय…..

दूसरे धरमेर छचार,
नोकरीन कोनी वीय कायी !
वोंदून काहा पचं,
हूंडार लालच छेयी….

हारयेक वातेर खरचो,
आदोआदो वटारे !
करताणीं कोरीकार,
सावकारीम गळो कोनी कटारे….

देकादेक गोरमाटीम आबं,
लेरे वळक पछाणं मेळावा !
लाखा बळद पसंद वीय तो,
बाजार भाव हाम कळावा….

आकीमायीती हूंडा नामेरो,
काडेसवायी आंजन !
गोरमाटीर परगती वीय कोनी,
केरो कवी नीरंजन….

निरंजन बळीराम मुडे